पेंशनर्स के डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान में 5 दिन में 40 लाख प्रमाणपत्र, फेस ऑथेंटिकेशन 80% तक पहुंचा
नई दिल्ली, 8 नवंबर 2026 | RiseIndia24 डेस्क
पेंशन पाने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवाने की सुविधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान के शुरुआती पांच दिनों में करीब 40 लाख प्रमाणपत्र बनाए गए। पिछले साल इसी अवधि में लगभग 25 लाख प्रमाणपत्र बने थे। सरकार के मुताबिक, इस बार संख्या में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 6 नवंबर को अभियान के पांचवें चरण की औपचारिक शुरुआत की। यह अभियान 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक चल रहा है। सरकार ने बताया कि फेस ऑथेंटिकेशन यानी मोबाइल कैमरे से चेहरे की पहचान के जरिए प्रमाणपत्र बनाने का इस्तेमाल भी बढ़ा है। इस तरीके का हिस्सा पिछले साल के 61 प्रतिशत से बढ़कर करीब 80 प्रतिशत हो गया है।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है?
पेंशन जारी रखने के लिए पात्र पेंशनर्स को समय-समय पर यह प्रमाण देना होता है कि वे जीवित हैं। इसे जीवन प्रमाणपत्र या लाइफ सर्टिफिकेट कहा जाता है। पहले कई पेंशनर्स को यह दस्तावेज जमा करने के लिए बैंक या संबंधित कार्यालय जाना पड़ता था। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के जरिए यह प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकती है।
फेस ऑथेंटिकेशन सुविधा में स्मार्टफोन के कैमरे की मदद से पेंशनर की पहचान की जाती है। इससे उन बुजुर्गों को मदद मिल सकती है जिन्हें बैंक तक पहुंचने में परेशानी होती है या जिनके फिंगरप्रिंट स्कैन करने में दिक्कत आती है। प्रमाणपत्र बनने के बाद उसकी डिजिटल जानकारी संबंधित पेंशन व्यवस्था तक पहुंचाई जाती है।
बुजुर्गों को घर पर भी मिलेगी मदद
सरकार के अनुसार, इस अभियान के तहत देशभर में करीब 3,000 स्थानों पर शिविर और सहायता की व्यवस्था की जा रही है। जो बुजुर्ग पेंशनर्स शिविर तक नहीं पहुंच सकते, उनके लिए घर पर सेवा देने की व्यवस्था भी रखी गई है। अभियान में बैंक, डाक विभाग, पेंशनर्स संगठन और विभिन्न सरकारी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
पेंशनर्स अपने नजदीकी बैंक, डाकघर, पेंशन कार्यालय या संबंधित विभाग से अभियान के शिविर और उपलब्ध सहायता की जानकारी ले सकते हैं। डिजिटल प्रक्रिया के लिए ‘जीवन प्रमाण’ ऐप और फेस ऑथेंटिकेशन सुविधा का उपयोग किया जाता है। यदि किसी पेंशनर के पास स्मार्टफोन नहीं है या तकनीकी दिक्कत आती है, तो वह नजदीकी सहायता केंद्र से मदद मांग सकता है।
पेंशनर्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जीवन प्रमाणपत्र जमा करने से पहले पेंशनर को यह जांच लेना चाहिए कि वह किस विभाग, बैंक या पेंशन वितरण संस्था से पेंशन प्राप्त करता है और उसके लिए कौन-सी प्रक्रिया लागू है। प्रमाणपत्र जमा होने के बाद उसकी पावती या डिजिटल पहचान संख्या सुरक्षित रखें। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक का ओटीपी, पिन या पासवर्ड न बताएं।
यह अभियान खास तौर पर पेंशनर्स के लिए प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया आसान बनाने पर केंद्रित है। हर पेंशन योजना के नियम एक जैसे नहीं होते, इसलिए निजी या अन्य पेंशन योजनाओं के लाभार्थी अपने पेंशन कार्यालय से समय-सीमा की पुष्टि करें।
रिटायरमेंट के बाद आर्थिक योजना से जुड़ी RiseIndia24 की पिछली रिपोर्ट यहां पढ़ें। अन्य राष्ट्रीय खबरों के लिए राष्ट्रीय समाचार पृष्ठ देखें।
मूल स्रोत
पत्र सूचना कार्यालय: पांच दिनों में करीब 40 लाख डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, 6 नवंबर 2026। अभियान की अवधि और व्यवस्था के लिए 30 अक्टूबर की सरकारी सूचना भी देखें।
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