OpenAI का GPT-6 Cyber लॉन्च, साइबर सुरक्षा शोध में कमजोरियां खोजने में मदद करेगा
नई दिल्ली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनी OpenAI ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए GPT-6 Cyber नाम का नया मॉडल जारी किया है। फिलहाल इसका इस्तेमाल केवल चुनिंदा और जांचे-परखे ग्राहकों को दिया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि यह मॉडल सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियां खोजने, उनके संभावित दुरुपयोग की जांच करने और उन्हें ठीक करने में सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद कर सकता है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI ने 5 नवंबर 2026 को इस मॉडल को सीमित समूह के लिए जारी किया। यह आम ChatGPT उपयोगकर्ताओं के लिए खुला नया फीचर नहीं है। इसका इस्तेमाल अधिकृत सुरक्षा परीक्षण, कमजोरियों की पहचान और सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने जैसे कामों के लिए तय किया गया है।
कंपनी ने कितनी कमजोरियां खोजने का दावा किया?
OpenAI के मुताबिक, उसके शोधकर्ताओं ने GPT-6 Cyber की मदद से Firefox ब्राउजर में 81 ऐसी कमजोरियां खोजीं जिन्हें पहले सार्वजनिक नहीं किया गया था। Mozilla ने इन्हें गंभीर स्तर की कमजोरियों के रूप में वर्गीकृत किया और इनके लिए सुधार जारी करना शुरू किया।
कंपनी ने यह भी दावा किया कि मॉडल ने Linux kernel से जुड़ी 948 कमजोरियों के लिए काम करने वाले परीक्षण तैयार करने में मदद की। इनमें 588 कमजोरियां पहले अज्ञात थीं। OpenAI ने 304 गंभीर निष्कर्ष संबंधित रखरखावकर्ताओं को संभावित सुधारों के साथ बताए। ये आंकड़े कंपनी की ओर से जारी किए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र ऑडिट का परिणाम नहीं समझना चाहिए।
‘Critical’ सुरक्षा रेटिंग का क्या मतलब है?
OpenAI ने अपने सुरक्षा ढांचे में GPT-6 Cyber को साइबर सुरक्षा क्षमता के लिहाज से ‘Critical’ श्रेणी दी है। इसका अर्थ है कि मॉडल में सुरक्षा से जुड़े अत्यधिक सक्षम काम करने की क्षमता है और इसलिए इसका इस्तेमाल नियंत्रित पहुंच के साथ कराया जा रहा है। यह आम उपभोक्ताओं के लिए खतरे की चेतावनी नहीं, बल्कि मॉडल की क्षमता और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी कंपनी की श्रेणी है।
AI का इस्तेमाल जहां सुरक्षा कमजोरियां जल्दी खोजने में मदद कर सकता है, वहीं गलत हाथों में यही क्षमता साइबर हमलों को भी आसान बना सकती है। इसी कारण मॉडल की उपलब्धता सीमित रखी गई है।
स्रोत: Reuters की रिपोर्ट
RiseIndia24 डेस्क | 8 नवंबर 2026
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