ईरानी मिसाइलों से खाड़ी दहला: अमेरिकी सैन्य अड्डे और दुबई बने निशाना, क्षेत्रीय युद्ध का खतरा गहराया
खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष ने दशकों से चले आ रहे सुरक्षा समीकरणों को हिला दिया है। जिन देशों ने लंबे समय तक अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा किया, वे अब सीधे हमलों की जद में हैं। हालिया घटनाक्रम में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों का संकेत साफ था—जो देश अमेरिकी सैन्य ढांचे को समर्थन देंगे, वे भी निशाने पर आ सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि कार्रवाई “क्षेत्र में दुश्मन के सैन्य ठिकानों” के खिलाफ शुरू की गई। दूसरी ओर, अमेरिका ने संकेत दिया है कि टकराव कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। इसी बीच इज़राइल भी तेहरान और लेबनान में हमले तेज किए हुए है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
कतर में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा स्थित है, जहां सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड मुख्यालय भी है। बहरीन में अमेरिकी पांचवां बेड़ा तैनात है। कुवैत में बड़ा लॉजिस्टिक केंद्र और एयरबेस मौजूद है। यूएई और सऊदी अरब में अमेरिकी वायु सुविधाएं सक्रिय हैं, जबकि ओमान आधिकारिक बेस न होते हुए भी अमेरिकी बलों को पोर्ट और एयरफील्ड की अनुमति देता रहा है।
हमलों का दायरा और असर
रिपोर्टों के मुताबिक, संघर्ष के शुरुआती चरण में ही अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। कुवैत और यूएई में सैन्य व राजनयिक परिसरों पर हमले हुए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कई आम नागरिक हताहत हुए और सैकड़ों घायल बताए जा रहे हैं।
सऊदी अरब के प्रमुख तेल केंद्रों पर भी ड्रोन हमले की कोशिश हुई। रास तनुरा जैसी रणनीतिक रिफाइनरी, जो प्रतिदिन लाखों बैरल तेल प्रोसेस करती है, कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर खतरे ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
दुबई पर हमलों से बढ़ी चिंता
दुबई, जिसे अब तक सुरक्षित और स्थिर कारोबारी केंद्र माना जाता था, भी हमलों से अछूता नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, प्रमुख होटलों और बंदरगाह क्षेत्रों के आसपास विस्फोटों की खबरें सामने आईं। अल मिन्हाद एयर बेस और जेबेल अली पोर्ट जैसे अहम स्थानों पर भी हमले की सूचना मिली। कई रिहायशी इलाकों में मलबा गिरने से संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
यूएई के रक्षा अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से अधिकांश को रोक लिया गया, फिर भी कुछ हमले प्रभाव छोड़ गए।
बदलते क्षेत्रीय समीकरण
हाल के वर्षों में खाड़ी देशों ने ईरान के साथ संवाद की कोशिशें की थीं और संतुलन की नीति अपनाई थी। लेकिन मौजूदा संघर्ष ने उस रणनीति को चुनौती दे दी है। अब सवाल यह है कि क्या यह टकराव सीमित रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।
मध्य-पूर्व में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार मार्गों और कूटनीतिक संतुलन पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। आने वाले सप्ताह इस पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकते हैं।
298 total views

