Lunar Eclipse 2026: भारत में आंशिक दिखेगा, क्या करें और क्या न करें
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026, मंगलवार को पड़ रहा है। यह फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन होगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। भारत में यह ग्रहण “ग्रस्तोदित खंडग्रास चंद्र ग्रहण” के रूप में दिखाई देगा। इसका अर्थ है कि जब चंद्रमा का उदय होगा, उसी समय वह ग्रहण की अवस्था में नजर आएगा।
किन क्षेत्रों में दिखाई देगा ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। एशिया के अधिकतर देशों में, खासकर भारत सहित पूर्वी और मध्य एशिया में इसका प्रभाव दिखेगा। ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया क्षेत्र में यह सबसे स्पष्ट रूप में दिखाई देगा। इसके अलावा उत्तर अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी भाग और प्रशांत महासागर के आसपास के इलाकों में भी ग्रहण देखा जा सकेगा।
हालांकि अफ्रीका और यूरोप के अधिकांश क्षेत्रों में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
भारत में चंद्रमा के उदय के समय यह ग्रहण दिखाई देगा और अधिकतर स्थानों पर इसका अंतिम चरण ही साफ नजर आएगा। पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों, जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश, में पूर्णता की झलक मिल सकती है। वहीं दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में चंद्रोदय के समय आंशिक ग्रहण लगभग 20 से 25 मिनट तक देखा जा सकेगा।
ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)
- उपछाया ग्रहण आरंभ: दोपहर 02:14 बजे
- आंशिक ग्रहण आरंभ: दोपहर 03:20 बजे
- पूर्ण ग्रहण (टोटैलिटी): शाम 04:34 से 05:32 बजे तक
- आंशिक ग्रहण समाप्ति: शाम 06:45 बजे
- उपछाया समाप्ति: शाम 07:53 बजे
सूतक काल कब से लगेगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग नौ घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है।
- सूतक प्रारंभ: 3 मार्च 2026, सुबह 06:20 बजे
- सूतक समाप्ति: शाम 06:45 बजे (ग्रहण मोक्ष के साथ)
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक के नियम मान्य माने जाएंगे।
ग्रहण के दौरान क्या सावधानियां रखें?
क्या न करें:
- सूतक लगने के बाद भोजन से बचें (हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को छूट दी जाती है)
- सुई, कैंची, चाकू जैसी धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें
- कोई नया या शुभ कार्य शुरू न करें
- मंदिरों के पट बंद रखें और मूर्तियों को स्पर्श न करें
- ग्रहण के दौरान सोने से बचें
- यात्रा और दांपत्य संबंध से परहेज करें
क्या करें:
- ईश्वर के मंत्रों का जाप करें, जैसे ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’
- भोजन सामग्री में पहले से तुलसी के पत्ते या कुशा रख दें
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
- ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना शुभ माना जाता है
ग्रहण समाप्ति के बाद क्या करें?
- ग्रहण खत्म होते ही स्नान करें
- घर और पूजा स्थल में गंगाजल का छिड़काव करें
- मूर्तियों का शुद्धिकरण करें
- अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें
- ताजा भोजन बनाकर ही ग्रहण करें
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह ग्रहण मोक्ष काल में भारत में दृष्टिगोचर होगा, जिसका समय शाम 06:45 बजे है। ग्रहण के पहले और बाद में स्नान, मंत्र जाप और सात्विक आचरण को शुभ माना गया है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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