चावल की कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी, केंद्र ने सरकारी बिक्री का लक्ष्य दोगुना किया
नई दिल्ली, 8 नवंबर 2026: बाजार में चावल की कीमतों को काबू में रखने और पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना के तहत निजी कारोबारियों को चावल बेचने का लक्ष्य दोगुना कर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह लक्ष्य बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।
पहले कितना था लक्ष्य?
सरकारी घोषणा के मुताबिक, पहले यह लक्ष्य 25 लाख मीट्रिक टन था। अब इसे बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन किया गया है। सरकार का उद्देश्य बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ाना, जमाखोरी पर रोक लगाना और कीमतों में अनावश्यक तेजी को नियंत्रित करना है।
पांच राज्यों में स्टॉक सीमा
सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को चावल और धान पर स्टॉक सीमा लगाने की अनुमति भी दी है। यह व्यवस्था 31 जनवरी 2027 तक लागू रह सकती है। इसका मकसद बाजार में पर्याप्त अनाज उपलब्ध रखना और जमाखोरी पर नजर रखना है।
उत्पादन को लेकर चिंता क्यों?
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल धान उत्पादन पर मौसम का असर पड़ने की आशंका है। फसल पकने के समय सामान्य से कम बारिश होने से पैदावार घटने की चिंता जताई गई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है, इसलिए घरेलू बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है।
सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक निजी खरीदारों को योजना के तहत 25 लाख मीट्रिक टन चावल बेचा जा चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह मात्रा करीब 11 लाख मीट्रिक टन थी।
आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
सरकारी भंडार से खुले बाजार में अधिक चावल आने पर थोक बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, खुदरा दुकानों पर कीमतें कितनी घटेंगी, यह स्थानीय आपूर्ति, मांग, परिवहन लागत और कारोबारियों के दाम पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे तत्काल कीमत घटने की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
स्रोत: Reuters की रिपोर्ट, The Daily Star
RiseIndia24 डेस्क
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