सोने की तस्करी का काला खेल: करोड़ों का मुनाफा, खतरनाक तरीके और बड़ा नेटवर्क
भारत में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि निवेश और परंपरा का अहम हिस्सा है। देश में हर साल करीब 1000 टन सोने की खपत होती है, यही वजह है कि तस्करों के लिए यह सबसे बड़ा बाजार बन गया है। ज्यादा मुनाफे के लालच में तस्कर बेहद जोखिम भरे और चौंकाने वाले तरीके अपनाते हैं।
मुंबई एयरपोर्ट का बड़ा मामला क्या है?
अप्रैल 2026 में मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर राजस्व खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने बड़ी कार्रवाई की। नैरोबी से आई फ्लाइट के जरिए पहुंचीं 24 विदेशी महिलाओं को रोका गया, जिनके पास से करीब 29 किलोग्राम सोना बरामद हुआ। इसकी कीमत लगभग 38 करोड़ रुपये आंकी गई। सोना अलग-अलग तरीकों से कपड़ों, बैग और अन्य सामान में छिपाया गया था। यह इस साल के बड़े मामलों में शामिल है।
तस्करी के अजीब और खतरनाक तरीके

भारत में सोने की स्मगलिंग के लिए तस्कर लगातार नए तरीके अपनाते हैं। सोना कपड़ों, जूतों, बेल्ट, इलेक्ट्रॉनिक सामान और यहां तक कि शरीर के अंदर छिपाकर लाया जाता है। कई मामलों में सोने को पेस्ट या कैप्सूल के रूप में छिपाकर लाने की घटनाएं सामने आई हैं।
कुछ मामलों में यात्रियों ने सोना निगलकर लाने की कोशिश की, तो कहीं मलाशय या निजी अंगों में छिपाकर तस्करी की गई। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे मामलों में मेडिकल जांच तक करनी पड़ती है।
लोग जान जोखिम में क्यों डालते हैं?
सोने की तस्करी के पीछे सबसे बड़ी वजह भारी मुनाफा है। भारत में सोने की कीमत विदेशों की तुलना में ज्यादा होती है। टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी बचाकर तस्कर प्रति किलो सोने पर लाखों रुपये कमा लेते हैं।
उच्च कीमतों और लगातार बढ़ती मांग के कारण यह अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है। 2025-26 में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से तस्करी और बढ़ी है।
कैरियर को कितना मिलता है पैसा?

तस्करी में शामिल कैरियर (carrier) को आमतौर पर कुल माल का एक हिस्सा या तय रकम दी जाती है। कई मामलों में एक ट्रिप के लिए उन्हें लाखों रुपये मिलते हैं। आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और बेहतर कमाई के लालच में लोग इस जोखिम भरे काम के लिए तैयार हो जाते हैं।
सिंडिकेट उन्हें ट्रेनिंग, टिकट और रहने की सुविधा देता है, लेकिन पकड़े जाने पर सजा का खतरा उन्हीं पर होता है।
सरकार क्या कदम उठा रही है?
तस्करी रोकने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, कस्टम्स और एयरपोर्ट एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव जैसे कदम भी उठाए हैं ताकि अवैध कारोबार कम हो सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर भी नजर रखी जा रही है।
कुल मिलाकर, सोने की तस्करी एक बड़ा और संगठित अपराध बन चुका है, जिसमें भारी मुनाफे के साथ-साथ जान का भी बड़ा जोखिम जुड़ा हुआ है।
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