ED की बड़ी कार्रवाई: अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स ग्रुप पर छापे, करोड़ों की नकदी और संपत्ति के दस्तावेज जब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 अप्रैल 2026 को अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दिल्ली और गुरुग्राम में व्यापक छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई, जिसमें कुल 10 स्थानों पर तलाशी ली गई। ये ठिकाने कंपनी के डायरेक्टर, प्रमोटर और उनसे जुड़े लोगों के बताए जा रहे हैं।

छापे के दौरान एजेंसी को बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती सामान बरामद हुआ। करीब 6 करोड़ रुपये से अधिक कैश, करोड़ों के आभूषण, चांदी की ईंटें और महंगी घड़ियां जब्त की गईं। इसके अलावा 100 से ज्यादा संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें कई संदिग्ध बेनामी संपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इनकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
इस पूरे मामले की शुरुआत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज कई एफआईआर से हुई थी, जिनमें कंपनी और उसके अधिकारियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भरोसा तोड़ने के आरोप लगाए गए थे। साथ ही गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने भी कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ कंपनी कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

जांच में सामने आया है कि कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ समेत कई शहरों में विभिन्न रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे। इन प्रोजेक्ट्स के नाम पर हजारों निवेशकों और घर खरीदारों से बड़ी रकम जुटाई गई।
एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने लगभग 19 हजार से अधिक निवेशकों से 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि इकट्ठा की। लोगों को समय पर मकान देने और आकर्षक रिटर्न का वादा किया गया, लेकिन कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए और खरीदारों को कब्जा नहीं मिल सका।
ED की जांच में यह भी संकेत मिला है कि जुटाई गई राशि का इस्तेमाल परियोजनाओं में करने के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया। आरोप है कि इस पैसे से जमीन खरीदी गई, फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन का ट्रांसफर किया गया और निजी खर्चों में भी उपयोग हुआ।
इस मामले में अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता को प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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