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बिजली भंडारण के लिए केंद्र की ₹14,500 करोड़ की योजना, 92 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य


नई दिल्ली, 8 नवंबर 2026 | RiseIndia24 डेस्क

सौर और पवन ऊर्जा से बिजली का उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। दिन में ज्यादा बिजली बनने पर उसे सुरक्षित रखकर शाम या रात में इस्तेमाल करना एक बड़ी जरूरत है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने देश में बड़े स्तर पर बिजली भंडारण व्यवस्था विकसित करने के लिए ₹14,500 करोड़ की सहायता योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 92 गीगावाट-घंटा (GWh) नई भंडारण क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

92 GWh क्षमता किस तरह तैयार होगी?

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार, इस योजना में तीन तरह की तकनीकों को शामिल किया गया है। कुल लक्ष्य में 60 GWh क्षमता पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं से, 30 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों से और 2 GWh नई या उभरती भंडारण तकनीकों से तैयार की जाएगी। सरकार ने इन परियोजनाओं में कुल ₹97,600 करोड़ के निवेश का अनुमान लगाया है।

पंप्ड हाइड्रो व्यवस्था में बिजली उपलब्ध होने पर पानी को नीचे के जलाशय से ऊपर के जलाशय में पंप किया जाता है। जरूरत के समय पानी नीचे छोड़ा जाता है और उससे टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है। बैटरी प्रणाली में बिजली को बैटरी में जमा किया जाता है और मांग बढ़ने पर ग्रिड को वापस दिया जा सकता है।

सरकार की सहायता कैसे मिलेगी?

₹14,500 करोड़ की राशि व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) के रूप में दी जाएगी। आसान भाषा में इसका मतलब है कि सरकार परियोजना की शुरुआती आर्थिक कठिनाइयों को कम करने के लिए वित्तीय सहायता देगी, ताकि बड़े भंडारण संयंत्र लगाना निवेशकों के लिए संभव हो सके। परियोजनाओं का आवंटन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।

बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य भारत में बैटरी और उससे जुड़े पुर्जों के निर्माण को बढ़ावा देना तथा आयात पर निर्भरता घटाना है। पंप्ड हाइड्रो और बैटरी परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां सहायता की पात्र होंगी।

बिजली उपभोक्ताओं को क्या फायदा हो सकता है?

भंडारण क्षमता बढ़ने से दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सौर या पवन बिजली को बाद में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे शाम के समय मांग बढ़ने पर ग्रिड को संभालने में मदद मिल सकती है। सरकार के अनुसार, 2031-32 तक देश को करीब 411 GWh ग्रिड-स्तरीय भंडारण क्षमता की जरूरत होगी। नई योजना इस लक्ष्य की दिशा में एक कदम है।

हालांकि यह योजना सीधे घरों के बिजली बिल में छूट देने वाली योजना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली व्यवस्था को ज्यादा भरोसेमंद बनाना और नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करना है। उपभोक्ताओं को इसका लाभ बिजली आपूर्ति की स्थिरता और भविष्य में ऊर्जा व्यवस्था की मजबूती के रूप में मिल सकता है। वास्तविक असर परियोजनाओं के निर्माण और चालू होने के बाद ही सामने आएगा।

भारत में सौर ऊर्जा और घरेलू उत्पादन से जुड़ी खबर यहां पढ़ें। कारोबार और अर्थव्यवस्था की अन्य खबरों के लिए RiseIndia24 का बिजनेस पृष्ठ देखें।

मूल स्रोत

प्रधानमंत्री कार्यालय: 92 GWh बिजली भंडारण योजना को मंजूरी, 4 नवंबर 2026।

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