शशि थरूर का बयान: ‘शांति सबसे जरूरी, युद्ध का असर भारत तक पहुंचा’
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका-ईरान के बीच जारी शांति वार्ता को लेकर कहा है कि भारत की प्राथमिकता केवल शांति है, चाहे वह किसी भी देश की पहल से क्यों न आए। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ रहा है।
थरूर ने कहा कि इस युद्ध का प्रभाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति और उद्योगों पर साफ देखा जा रहा है। प्राकृतिक गैस उत्पादन में आई बाधाओं के कारण देश की फैक्ट्रियों और यहां तक कि आम लोगों की रसोई पर भी असर पड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध का जल्द समाप्त होना भारत के हित में है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को गंभीरता से निभाना होगा। उनके मुताबिक, शांति प्रयासों में सक्रिय रहना जरूरी है, भले ही कभी-कभी यह भूमिका शांत कूटनीति के जरिए निभानी पड़े। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत के शीर्ष नेता और मंत्री इस मुद्दे पर लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने कहा कि इस मामले में उसके अपने रणनीतिक और भौगोलिक कारण हैं। अमेरिका के साथ उसके संबंध, ईरान के साथ उसकी सीमाएं और वहां की सामाजिक संरचना उसे इस तरह की पहल में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शांति की कोशिशों के बावजूद भारत को अपने पुराने अनुभवों और सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत की चिंताएं कायम हैं और इन्हें भुलाया नहीं जा सकता।
अंत में थरूर ने कहा कि भारत को बड़े दृष्टिकोण के साथ सोचने की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि मौजूदा समय में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया जाए, लेकिन साथ ही देश के हितों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सतर्कता भी बनाए रखी जाए।
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