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ईरान-अमेरिका सीजफायर पर घमासान – शहबाज शरीफ के दावे से लेबनान विवाद में आया नया मोड़


ईरान और अमेरिका के बीच कथित युद्धविराम समझौते को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक दावे ने इस मुद्दे को और उलझा दिया है, जिस पर अब अमेरिका और ईरान दोनों ने सवाल उठाए हैं—खासतौर पर लेबनान को लेकर किए गए उल्लेख पर।

बताया गया कि शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों—जिसमें लेबनान का भी जिक्र किया गया—ने दो सप्ताह के लिए हमले रोकने और बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। लेकिन व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज करते हुए साफ किया कि लेबनान कभी भी इस समझौते का हिस्सा नहीं था और यह बात पहले ही स्पष्ट कर दी गई थी।

इसी बीच, युद्धविराम की घोषणा के बावजूद इजरायल द्वारा लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रहने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसके जवाब में ईरान ने कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होरमुज को फिर से बंद करने का कदम उठाया।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट हैं और अब अमेरिका को तय करना होगा कि वह वास्तव में शांति चाहता है या फिर इजरायल के माध्यम से संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया लेबनान में जारी हिंसा को देख रही है और अब अमेरिका की विश्वसनीयता दांव पर है।

इसके बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपने बयान में कहा कि लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं था। वहीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने भी इसी बात को दोहराया।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या शहबाज शरीफ ने गलत जानकारी साझा की या फिर समझौते की शर्तों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी। इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बातचीत शुरू होने से पहले ही कई शर्तों का उल्लंघन हो चुका है। उनके अनुसार, लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं हुआ, ईरान में ड्रोन हमले की कोशिश की गई, और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को स्वीकार नहीं किया गया—जो प्रस्ताव के अहम बिंदु थे।

पूरे घटनाक्रम ने न केवल इस कथित युद्धविराम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली वार्ताओं को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ा दी है।

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