केंद्र का बड़ा फैसला: डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी, पेट्रोल पर राहत बरकरार
केंद्र सरकार ने 11 अप्रैल 2026 को ईंधन निर्यात नीति में अहम बदलाव करते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ी वृद्धि का ऐलान किया है। नए फैसले के तहत डीजल पर लगने वाली ड्यूटी को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, जेट फ्यूल पर यह शुल्क 29.5 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
इस बदलाव को तेल कंपनियों के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके निर्यात मार्जिन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल को इस बदलाव से बाहर रखा है और उस पर एक्सपोर्ट ड्यूटी पहले की तरह शून्य ही रखी गई है।
सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य वजह घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर, खासकर मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जहां ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। ऐसे में सरकार निर्यात को नियंत्रित कर घरेलू सप्लाई मजबूत रखना चाहती है।
यह निर्णय सरकार के विंडफॉल टैक्स ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी दरों में बदलाव किया जाता है। इसका उद्देश्य रिफाइनिंग कंपनियों के मुनाफे और देश के अंदर ईंधन की मांग के बीच संतुलन बनाए रखना है।
इस फैसले का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो रिफाइंड डीजल और ATF का निर्यात करती हैं। फिलहाल पेट्रोल को इस बदलाव से अलग रखते हुए सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है।
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